राग और भक्ति और उनके बदले हुए नाम आदि
प्रथम तो भक्तगण रागों को भक्ति से योग कर अनुभव नहीं कर रहे है और बहुत सी दिव्य रागों का नाम आदि बदल गया है । यमुना से यमन करने में कितना कुछ बदल गया है , वर्तमान में भी वह फिल्मों में बहुत प्रयोग है परन्तु यमन मानकर । जबकि यमन या अरब क्षेत्र में उस राग का गान होता ही नहीं है और कथित सनातनी यमन को हय दृष्टि से देखते है जैसे कि वह इस संस्कृति में थी ही नहीं जबकि श्याम कल्याण आदि भी उनके साम्य स्वरूप है । खमाज और काफ़ी तो समझना और भी जटिल ही है । इस लिंक से कुछ रागों के संस्कृत में वर्णित नाम देखें ... https://www.karnatik.com/hcragatable.shtml