जिस शिव की महिमा को उपनिषदों के ऋषि गाते हैं, वह शिव है- ‘सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्यं मध्ये, विश्वस्य सृष्टारमनेक रूपम्। विश्वस्यैकं परिवेष्टितारं, ज्ञात्वा शिवं शान...
कारण ... कारण ना होता तो मानव ही क्युं होता ! कारण से ही मानव देह मिली आत्मा को ! कारण ना हो तो मानव ना हो , जीव की असंतुष्टी ही मानव देह तक लाती है | मानव अहम् की विस्मृति कर सकें | कैसे ...
जो स्वयं को अज्ञानी कह लेते है ! क्या वाकई ऐसा है ! वें अज्ञानी है क्या ? देखियें जो अबोध है ... अज्ञानी है वो तो प्रभु के निकट है ! बिल्कुल निकट ! ज्ञान का अर्थ है भगवत् ज्ञान ... आत्मा - पर...