बेख़ुदी ही मज़ेदार है होकर उनका जाने है हम ऐ यादों सिसकियाँ ही वफ़ादार है युं दरवाजे पर ख़ामोश है हम फ़ुरसत नहीं अब ना जाने कब द़िल्लगी करलें सनम युं कुछ करते नहीं बेप़नाह ...
है ना यें सुन्दर . जी ये इतने सुन्दर है कि हर बार की कल्पना झुठी लगती है सुन्दर है तो नज़र तो उतारेंगें ग़र हमारे है ... वरना सौन्दर्य किसी का देख हम हर्षित कम होते है खिजते ज्याद...