यहाँ बड़ा शोर है ... इतना शोर स्वामी - स्वामिनी जु को स्पर्श ना करें , यहाँ मीठी मीठी नहीँ , झड़प भी हो रही जबकि यहाँ मेरे नाथ स्वामिनी संग प्रेम मय ... !! हे भगवन् , हे मेरे प्राण ! मेरे प्रि...
स्वार्थ सिद्धि कुछ भी हो वह भक्ति नही होती । भले भगवन प्रकट हो जावें तप या किसी भी साधन से पर प्रकट सकामता हेतु किये गए तो भक्ति नही हुई । भक्ति में भगवान को प्रकट होने के लिये ...
जैसा कि पूर्व में बात हुई ... कर्म की उत्पत्ति है कामना , चाह , संकल्प । और भगवान ने इन्हे ही दूर करने को कहा । वही नही , सब ने कहा । कामना न करो । गुरु जन । बोधत्व प्राप्त सब ने । कामना ...
लीला और कर्म जयजय श्यामाश्याम । कुछ समय पूर्व हमने इस विषय पर विचार चाहा था , लीला और कर्म । रुझान बड़े सुंदर मिलें इस तरह प्रश्न होने चाहिये जिससे सत्संग रूपी सौन्दर्यता मे...
हमारा सम्बन्ध कहाँ होता है जहाँ विश्वास हो । बिना विश्वास सम्बन्ध नहीं रहता है । जिससे सम्बन्ध हो वहीँ प्रिय होगा । पहले विश्वास हो फिर सम्बन्ध हो , जिससे सम्बन्ध है वह स्वत...
निष्कामता में आत्मियता निष्कामता में आत्मियता हम संसारिक निष्कामता से कोसों दूर रहते है । सकाम हुये बिन कुछ करते अब हमसे नही होता । जब तक कामना है तब तक जिससे भी राग होगा , आ...