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रसिक सन्तो के भजन की रक्षा हो , ना कि फेसबुक पेज

फेसबुक और यू टयूब का लक्ष्य व्यापार है । यह आप इनकी टीम और अधिकारियों से जान सकते है । विरक्त सन्तों के भजन की रक्षा हेतु उनके फेसबुक पेज और यूटयूब चेनल ना बनाइए । भजनार्थ एक...

संस्कार - तृषित

*संस्कार* संस्कार वह है जिसे सिखा भी नहीं है और छुट नहीं पाता । अनन्त योनियों मे जीव संस्कार वश पशु है । अनन्त योनियों की पशुता सँग जब चेतना भगवदीय करुणा से मानव देह पाती है तब ...

प्यारे के नयन , तृषित

*प्यारे के नयन* कब तक है यह मन भटकता हुआ , जब तक इसे स्थिर रस ना मिले । यह वास्तविक सौंदर्य से ना टकरा जावें , दृष्टि बन भागता यह मन बहुत भागे तो टकरा जाता .. हर लिया जाता यह श्रीप्या...

अवलम्ब - तृषित

*अवलम्ब* प्रबल प्रपंच की वेदनाओं में छूती मधुरा कोमल पदतल से हिय तुम सघन विक्षेप द्वन्द संग्रामों के उधर सन्ध्या हो सजती नृत्तिका सी तुम विकट जीवन की अन्धतम घाटियों से नि...

सेवा विकास , तृषित

*सेवा विकास* श्री युगल के हृदय की मन की परस्पर के सुखार्थ की अनन्त वृत्तियाँ ही सखियाँ है ॥जैसे सागर की अनन्त लहरें सागर से अभिन्न ... ...सागर का ही अनन्त उल्लास वह । श्री युगल रस आ...

निकुंज गाढ़ता , तृषित

परस्पर जगत में बतियाना सरल है । इस प्रीति रस को झेलना उतना ही दूभर है । वहाँ निभृत स्थिति इसलिये है क्योंकि अन्य की स्थिति कुँज रस में प्रवेश की भी नहीं होती है । कुँज रस में द...

वैष्णव , तृषित

वैष्णव जीव दृष्टि से भगवत्स्वरूप का ही यथार्थ चिंतन असमर्थ है । जिस दिव्य स्थिति में रसमय सन्तों को भगवत और भक्त दर्शन अनुभूति होती है । वह स्थिति लिखित रस से बाह्य हम सब प...