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सम्पूर्ण भुवनों में दृष्टि प्राप्त के नेत्रों कहां विश्राम मिल सकता है ... ???

सम्पूर्ण भुवनों में दृष्टि प्राप्त के नेत्रों कहां विश्राम मिल सकता है ... ??? मधुर मन्द श्री श्यामसुन्दर के हास्य पर । हास्य यहाँ हास्य का हार ही । एक हास्य नहीँ जैसे हास्य की म...

रस भाव की पकड़

उनका सुख । यह चिन्तन पक्का हो जाये । तो सम्भव है बाहर जीवन विचित्र लगे । पर आपका हृदय जानेगा हो रहा है , उन्हें ही सुख । और बाह्य या आंतरिक किसी कुंठा से उनके सुख में कुछ भी बाधा ...

मुलाक़ात

मुलाक़ात अब  किसे  सुनाये  हम  कि  हम  मिले  या  नहीँ तुम  कुछ  कहते  नहीँ  हम  कभी  ठहरते  ही  नहीँ मुलाकातों  की  तो  हद  कर  देते  हो  तुम  जहाँ  कल  खड़े  थे  वहीं  आज  खड़े  ...

उनसे बस एक शिकायत , तृषित

एक भाव 3वर्ष पूर्व लगभग का____ तुमसे बस एक शिकायत है तुम दर्द को इतना मीठा कर देते हो वो ज़िन्दगी से प्यारा लगने लगता है तुमसे बस इतना सा डर है तुम मेरे इल्म को पढ़ लेते हो फिर मुझे म...

रिश्ता उनसे , कविता , तृषित

रिश्ता जब किसी को दिल में सीधा दर्द करना हो उनसे मेरा रिश्ता पूछता है रिश्ता तो है , वो फूल से महकते मैं काँटों सी अपनी चुभन छुपाता रिश्ता तो गहरा सा होता पर कभी उन्हें दर्द ह...

बहुत कोमल वह सो शहद गिरे हमारी आँखों से , तृषित

जी । उन्हें पीड़ा न हो । यही सहज स्वरूप । उन्हें तनिक कष्ट न हो । अति कोमल । और सहज भी तो ... । जो जहां जब जैसे निरखे वह वहाँ वैसे ही तब प्रकट । अब निरखने वाले के गुलाब सी कोमल निगाहें ह...

इच्छा शक्ति की अवस्था से पता चलेगा । अध्यात्म में हम कहां ... ?? तृषित

इच्छा शक्ति की अवस्था से पता चलेगा । अध्यात्म में हम कहां ... ?? इच्छा शक्ति को मुक्त करते ही वह प्रीति होगी । उससे पूर्व जीव कामना के वशीभूत , ईश्वर भाव अनुरूप कामना की पूर्ति रू...