तृषित चौथ पर एक पद भाव
[10/19, 10:28 PM] सत्यजीत तृषित: कोटिन चन्द्रज पंक बनत जिन चरणन संग दमकत
निशि या श्यामल तव चरणन स्पर्शन संग शीतल ठुमकत
प्रिया पुलकन मधु मिश्रित पवन अणु पावत चन्द्रिका जगमग
[10/19, 10:37 PM] सत्यजीत तृषित: मम हित साजन सजनी तोरी या दासिन तोरे सुख को अणु अणु तरसे
भोले लाल जु भोरी सी लाली मोरि काहे रस-रंग बिसार देखत मोहे नैन बरसे
प्रीत केलि मञ्जरी सेवित भोरी , लाड़ली भोरी तुलसी व्रत सेवे
अनुपम रीत सेवा सुख सब अलिन की , बिन देखत सुनत-सुनत अति नैनन मेड टूटे
Comments
Post a Comment